भास्कर: इंदौर। 343 परिवार और 1479 की आबादी वाला गोरबा गांव पीएम मोदी की मन की बात के बाद देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। गोरबा देवास के टोंकखुर्द तहसील की एक छोटी सी ग्राम पंचायत है। यहां के लोगों ने पानी की खेती कर देश को एक नई राह दिखाई है। पढ़ें, क्या होती है पानी की खेती...
- देवास का गोरबा गांव कभी भीषण जलसंकट का शिकार था।
- भू-जल का स्तर घटते-घटते 400 फीट से भी नीचे चला गया था।
- लोगों को पीने के लिए दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता था।
- फसल की पैदावार तो मानों ना के बराबर हो गई थी।
- पानी की समस्या के चलते लोग गांव छोड़कर जाने लगे थे।
- भू-जल का स्तर घटते-घटते 400 फीट से भी नीचे चला गया था।
- लोगों को पीने के लिए दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता था।
- फसल की पैदावार तो मानों ना के बराबर हो गई थी।
- पानी की समस्या के चलते लोग गांव छोड़कर जाने लगे थे।
ऐसे शुरू हुई पानी की खेती...
आईआईटी रूडकी से पासआउट उमाकांत उमराव 2006 में देवास कलेक्टर बनकर आए।
जिले में पानी की गंभीर स्थित देखते हुए उन्होंने किसानों को अपने खेत में एक छोटे हिस्से में तालाब बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
बैंक और सोसाइटी को उन्होंने किसानों को तालाब बनाने के लिए लोन देने के लिए भी राजी किया।
उनके प्रयासों ने गोरबा गांव के 150 से ज्यादा किसानों ने अपने खेत में तालाब बनाए।
खेत में तालाब बनाने के काम को पानी की खेती नाम दिया गया।
किसानों को ये समझाया कि फसल से उन्हें लाभ होता है वैसे ही पानी की खेती करने से भी उन्हें लाभ होगा।
कलेक्टर आशुतोष अवस्थी के अनुसार वर्तमान में गोरबा में 150 निजी और दो सरकारी तालाब हैं।
हर किसान साल में दो फसल ले रहा है। इसके चलते गांव का हर परिवार अब सम्पन्न है।
गोरबा में एक बीज उत्पादक सहकारी समिति भी है। ये गांव बीच के मामले में भी आत्म-निर्भर है।
कृषि उपसंचालक डॉ. अब्बास पटेल बताते हैं कि पानी की खेती ने इस क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है।
उनके अनुसार पंचायत में 170 तालाब हैं और सभी में भरपूर पानी है।
जिले में पानी की गंभीर स्थित देखते हुए उन्होंने किसानों को अपने खेत में एक छोटे हिस्से में तालाब बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
बैंक और सोसाइटी को उन्होंने किसानों को तालाब बनाने के लिए लोन देने के लिए भी राजी किया।
उनके प्रयासों ने गोरबा गांव के 150 से ज्यादा किसानों ने अपने खेत में तालाब बनाए।
खेत में तालाब बनाने के काम को पानी की खेती नाम दिया गया।
किसानों को ये समझाया कि फसल से उन्हें लाभ होता है वैसे ही पानी की खेती करने से भी उन्हें लाभ होगा।
कलेक्टर आशुतोष अवस्थी के अनुसार वर्तमान में गोरबा में 150 निजी और दो सरकारी तालाब हैं।
हर किसान साल में दो फसल ले रहा है। इसके चलते गांव का हर परिवार अब सम्पन्न है।
गोरबा में एक बीज उत्पादक सहकारी समिति भी है। ये गांव बीच के मामले में भी आत्म-निर्भर है।
कृषि उपसंचालक डॉ. अब्बास पटेल बताते हैं कि पानी की खेती ने इस क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है।
उनके अनुसार पंचायत में 170 तालाब हैं और सभी में भरपूर पानी है।
जिले में 10 हजार तालाब
गोरवा, धतूरिया और चिड़ावद टोंकखुद के आसपास के ऐसे गांव हैं जो इस अभियान के प्रेरक बने।
तीनों गांवों को जलसंवर्धन के लिए अलग-अलग वर्षों में राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। आज जिले में आज 10 हजार से ज्यादा खेत तालाब हैं।
पहले 10-12 ट्रैक्टर थे, अब 80 हैं।
अधिकतर किसान कार से चलते हैं।
गांव में 5 दूध डेयरी हैं और यहां रोज 1000 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
गोरवा, धतूरिया और चिड़ावद टोंकखुद के आसपास के ऐसे गांव हैं जो इस अभियान के प्रेरक बने।
तीनों गांवों को जलसंवर्धन के लिए अलग-अलग वर्षों में राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। आज जिले में आज 10 हजार से ज्यादा खेत तालाब हैं।
पहले 10-12 ट्रैक्टर थे, अब 80 हैं।
अधिकतर किसान कार से चलते हैं।
गांव में 5 दूध डेयरी हैं और यहां रोज 1000 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
मन की बात में किया पीएम ने जिक्र
कलेक्टर आशुषोत अवस्थी के अनुसार गांव की पंच ताराबाई पटेल को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जल बचाव अभियान के तहत सम्मानित कर चुकी हैं।
कलेक्टर आशुषोत अवस्थी के अनुसार गांव की पंच ताराबाई पटेल को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जल बचाव अभियान के तहत सम्मानित कर चुकी हैं।
पीएम मोदी ने मन की बात में गोरबा का खासतौर पर जिक्र कर यहां किए गए बेहतर कामों की सराहना की।
पीएम ने देश में सूखे और जलसंकट का जिक्र करते हुए कहा कि देवास जिले में जल संरक्षण और प्रबंधन का बेहतर कार्य हुआ है। इसका सभी को अनुसरण करना चाहिए।


